25% से 18% तक गिरा टैरिफ! US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत को मिली राहत?

25% से 18% तक गिरा टैरिफ! US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत को मिली राहत?

US-India ट्रेड पर बड़ा अपडेट सामने आया है। टैरिफ को लेकर आए नए फैसले ने एक्सपोर्ट सेक्टर में हलचल मचा दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 6-3 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाया राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के IEEPA कानून के तहत लगाए गए सभी टैरिफ गैरकानूनी और अमान्य हैं। इसका मतलब है कि भारत पर लगा 25% रेसिप्रोकल टैरिफ अब कानूनी तौर पर खत्म हो गया है।

लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है। ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए Section 122 के तहत 10% ग्लोबल सरचार्ज लगा दिया है। तो आखिर भारत पर अभी कितना टैरिफ लगेगा? पूरी टाइमलाइन और असर समझते हैं।

पूरी टाइमलाइन – 0% से 50% और फिर 10% तक का सफर

अप्रैल 2025 से पहले भारतीय सामान पर अमेरिका में सिर्फ MFN (Most Favoured Nation) ड्यूटी लगती थी यानी WTO के तहत सामान्य दरें। कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं था।

2 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने “Liberation Day” घोषित करते हुए भारत सहित 60 देशों पर 10% रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिया। यह IEEPA (International Emergency Economic Powers Act, 1977) कानून के तहत किया गया। भारत पर कुल बोझ हुआ MFN + 10%।

7 अगस्त 2025 को ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया 150% की बढ़ोतरी। भारत पर बोझ बढ़कर MFN + 25% हो गया। फिर 27 अगस्त 2025 को भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की सज़ा के तौर पर अतिरिक्त 25% पेनल्टी लगाई गई। अब भारत पर कुल टैरिफ MFN + 50% हो गया यानी ट्रंप के आने से पहले की तुलना में पांच गुना ज्यादा।

6 फरवरी 2026 को भारत-अमेरिका ने इंटरिम ट्रेड डील की घोषणा की। अमेरिका ने रूसी तेल वाली 25% पेनल्टी हटाई और रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई। भारत पर बोझ MFN + 18% होना था लेकिन यह 18% कभी लागू नहीं हो पाया।

20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के तहत लगाए गए सभी टैरिफ रद्द कर दिए। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा “IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। टैक्स और ड्यूटी लगाने का अधिकार कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।”

लेकिन ट्रंप ने तुरंत 20 फरवरी को ही Trade Act 1974 के Section 122 के तहत 150 दिनों के लिए 10% अस्थायी ग्लोबल सरचार्ज लगा दिया। यह 24 फरवरी 2026 से लागू होगा।

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तो अभी भारत पर कितना टैरिफ है?

24 फरवरी 2026 से भारतीय सामान पर MFN + 10% टैरिफ लगेगा। यह 150 दिनों (26 जुलाई 2026 तक) के लिए अस्थायी है। GTRI (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) के अनुसार सभी सेक्टर मिलाकर भारतीय एक्सपोर्ट पर औसत प्रभावी टैरिफ करीब 13.5% होगा।

लेकिन ध्यान रखें Section 232 के तहत स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ और कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ पहले से लगा हुआ है और वह बरकरार रहेगा। ये सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं हैं क्योंकि ये IEEPA नहीं बल्कि दूसरे कानूनों के तहत लगाए गए हैं।

अच्छी बात यह है कि भारत के कई प्रमुख एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स स्मार्टफोन, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पहले से ही अमेरिकी टैरिफ से बाहर हैं। ये भारत के कुल एक्सपोर्ट वैल्यू का करीब 40% हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का क्या होगा?

6 फरवरी 2026 की इंटरिम डील अभी भी टेबल पर है। इस डील में भारत ने अमेरिकी इंडस्ट्रियल और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने और $500 अरब के अमेरिकी प्रोडक्ट्स (एनर्जी, ICT, कोयला) खरीदने का इरादा जताया था। बदले में अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 18% करने की बात कही थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 18% टैरिफ की कानूनी बुनियाद ही खत्म हो गई है और भारत पर सिर्फ 10% अस्थायी टैरिफ है। ऐसे में GTRI ने सलाह दी है कि भारत को ट्रेड डील की शर्तों पर फिर से विचार करना चाहिए। अगर टैरिफ पहले ही 10% पर आ गया है तो भारत को 18% वाली डील के लिए इतनी रियायतें देने की जरूरत नहीं।

कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अगले महीने साइन हो सकती है और अप्रैल में लागू हो सकती है। भारतीय टीम 23 फरवरी से वाशिंगटन में अमेरिकी पक्ष से मिलने जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम है?

यह फैसला सिर्फ भारत के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए बड़ा है। IEEPA 1977 का कानून है जो राष्ट्रपति को आपातकाल में एसेट फ्रीज करने और सीमित प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। इसमें कहीं भी “टैरिफ” या “टैक्स” शब्द नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इसके “regulate importation” वाक्य को टैरिफ लगाने का अधिकार बताया था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाना कांग्रेस का काम है। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनकी ट्रेड पॉलिसी को सबसे बड़ा कानूनी झटका है।

भारतीय एक्सपोर्टर्स पर क्या असर?

टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और MSME सेक्टर को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। भारत के करीब 55% एक्सपोर्ट अब 18% से मुक्त होकर सिर्फ MFN + 10% पर आ गए हैं। कंपनियां अब तक चुकाए गए अरबों डॉलर के टैरिफ का रिफंड भी क्लेम कर सकती हैं हालांकि इसकी प्रक्रिया और समय अभी तय होना बाकी है।

शेयर बाजार पर भी असर दिखा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Gift Nifty में 320 पॉइंट्स की उछाल आई।

आगे क्या होगा?

अभी तीन बड़ी बातें देखने लायक हैं। पहली 10% अस्थायी टैरिफ को भी कानूनी चुनौती मिल सकती है क्योंकि Section 122 का इस्तेमाल पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर नहीं हुआ। दूसरी भारत-अमेरिका ट्रेड डील की नई शर्तें क्या होंगी, यह 23 फरवरी की वाशिंगटन बैठक के बाद साफ होगा। तीसरी ट्रंप ने चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ का भी ऐलान किया है जिससे अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और तेज होगा और भारत को “फ्रेंड-शोरिंग” का फायदा मिल सकता है।

आखिरी बात

पिछले 10 महीनों में भारतीय एक्सपोर्टर्स ने 0% से 50% तक का टैरिफ तूफान झेला। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ी राहत मिली है लेकिन यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई। GTRI की चेतावनी सही है “अमेरिका के साथ कोई भी डील कभी फाइनल नहीं होती।” भारत को सतर्क रहकर अपनी शर्तों पर बातचीत करनी होगी।

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